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पटना में LPG KYC के नाम पर ठगी का जाल, गैस एजेंसी बनकर खाते खाली कर रहे साइबर ठग
- Reporter 12
- 09 Apr, 2026
‘गैस सेवा बंद हो जाएगी’ कहकर लोगों को फंसा रहे ठग, पटना पुलिस ने जारी किया बड़ा साइबर अलर्ट
पटना/आलम की खबर:राजधानी पटना में साइबर ठगों ने अब रसोई गैस कनेक्शन और केवाईसी अपडेट को ठगी का नया हथियार बना लिया है। घर-घर की जरूरत से जुड़े एलपीजी गैस सिलेंडर को बहाना बनाकर अपराधी लोगों को फोन कर रहे हैं, खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बता रहे हैं और फिर डर, जल्दबाजी और तकनीकी झांसे का इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खाते तक पहुंच बना ले रहे हैं। पुलिस के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है और कई लोग सिर्फ एक फोन कॉल, एक लिंक या एक ऐप की वजह से आर्थिक नुकसान झेल चुके हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह ठगी किसी बहुत जटिल योजना के जरिए नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत और डर का फायदा उठाकर की जा रही है। रसोई गैस सेवा बंद होने, सब्सिडी रुकने या केवाईसी अधूरी होने जैसी बातें सुनकर लोग घबरा जाते हैं और इसी मानसिक दबाव में साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। पुलिस ने इसे गंभीर खतरा मानते हुए लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
‘आज शाम तक गैस सेवा बंद’—डर पैदा कर फंसाते हैं ठग
साइबर अपराधियों की यह चाल बेहद योजनाबद्ध होती है। वे उपभोक्ता को फोन कर खुद को किसी नामी गैस एजेंसी, डिस्ट्रीब्यूटर या सर्विस सेंटर का प्रतिनिधि बताते हैं। इसके बाद वे बेहद आत्मविश्वास से कहते हैं कि आपके गैस कनेक्शन में केवाईसी अपडेट नहीं है, आधार लिंक नहीं हुआ है, या सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रिया अधूरी है। कई बार वे यह भी कहते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं कराया गया, तो “आज ही आपकी गैस सेवा बंद कर दी जाएगी” या “आपकी बुकिंग ब्लॉक हो जाएगी”।
यहीं से ठगी का मनोवैज्ञानिक खेल शुरू होता है। घर में गैस सेवा बंद होने का डर, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और व्यस्त परिवारों में तुरंत घबराहट पैदा करता है। साइबर ठग इसी हड़बड़ी का फायदा उठाते हैं। वे उपभोक्ता को सोचने, जांचने या परिवार के किसी दूसरे सदस्य से सलाह लेने का मौका ही नहीं देना चाहते। उनका पूरा मकसद होता है—आपको जल्दी से जल्दी किसी लिंक, ऐप या ओटीपी के जाल में फंसा देना।
लिंक पर क्लिक करते ही फोन पर ठगों का कब्जा
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ठग आमतौर पर दो तरीके अपनाते हैं। पहला—वे उपभोक्ता को एक लिंक भेजते हैं और कहते हैं कि इस पर क्लिक कर KYC अपडेट कर लीजिए। दूसरा—वे किसी अनजान ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहते हैं, जिसे वे “वेरिफिकेशन ऐप”, “गैस अपडेट ऐप” या “कस्टमर सपोर्ट ऐप” जैसा नाम देकर भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते हैं।
जैसे ही कोई व्यक्ति इस तरह के संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है या ऐसा ऐप इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल की सुरक्षा कमजोर हो जाती है। कई मामलों में यह ऐप फोन का रिमोट एक्सेस मांगता है, यानी आपके फोन की स्क्रीन, मैसेज, बैंकिंग ऐप, कॉल और ओटीपी तक दूसरे व्यक्ति की नजर पहुंच सकती है। इसके बाद साइबर अपराधी बिना सामने आए, चुपचाप आपके खाते से पैसे निकाल लेते हैं। कई पीड़ितों को तो तब तक पता भी नहीं चलता, जब तक बैंक से पैसे कटने का मैसेज नहीं आ जाता।
ओटीपी, पिन और स्क्रीन शेयरिंग—ठगी के सबसे बड़े हथियार
साइबर ठगी के ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड डिटेल और स्क्रीन शेयरिंग से जुड़ा होता है। अपराधी अक्सर बड़ी सफाई से कहते हैं कि “हम कोई पैसा नहीं ले रहे, सिर्फ वेरिफिकेशन कर रहे हैं”, लेकिन असल में वे आपके खाते तक पहुंच बनाने की तैयारी कर रहे होते हैं। अगर आपने ओटीपी बता दिया, स्क्रीन शेयर कर दी या रिमोट ऐप को अनुमति दे दी, तो आपका बैंक खाता कुछ ही मिनटों में खाली हो सकता है।
यही वजह है कि पुलिस बार-बार लोगों को समझा रही है कि कोई भी वैध गैस एजेंसी, बैंक या सरकारी संस्था फोन पर आपसे ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, कार्ड सीवीवी या स्क्रीन शेयरिंग की मांग नहीं करती। जो भी ऐसा कर रहा है, वह लगभग निश्चित रूप से धोखाधड़ी की कोशिश कर रहा है।
पटना पुलिस ने जारी की खास चेतावनी
पटना साइबर थाना इस बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट मोड में है। साइबर पुलिस की ओर से लोगों को साफ संदेश दिया गया है कि गैस एजेंसी के नाम पर आने वाले किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप पर भरोसा न करें। अधिकारियों का कहना है कि असली एजेंसी कभी भी फोन पर उपभोक्ता से संवेदनशील बैंकिंग जानकारी नहीं मांगती और न ही किसी थर्ड-पार्टी ऐप को इंस्टॉल कराने के लिए दबाव बनाती है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि अगर किसी उपभोक्ता को वास्तव में गैस कनेक्शन, सब्सिडी या केवाईसी को लेकर कोई संदेह हो, तो वह सीधे आधिकारिक गैस एजेंसी कार्यालय, अधिकृत ऐप, आधिकारिक वेबसाइट या पंजीकृत ग्राहक सेवा नंबर से ही संपर्क करे। किसी अज्ञात मोबाइल नंबर से आई बात पर तुरंत भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है।
सिर्फ आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही करें गैस बुकिंग और KYC
आज के डिजिटल दौर में सुविधा के नाम पर लोग जल्दीबाजी में किसी भी लिंक पर क्लिक कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही कई बार भारी पड़ जाती है। पुलिस और विशेषज्ञों की सलाह है कि गैस बुकिंग, केवाईसी अपडेट, सब्सिडी चेक या कनेक्शन संबंधी किसी भी काम के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का ही इस्तेमाल करें। जैसे—गैस कंपनी का प्रमाणित मोबाइल ऐप, उसका आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल, एजेंसी कार्यालय, या कंपनी का सत्यापित हेल्पलाइन नंबर।
यदि किसी को KYC अपडेट कराने की जरूरत है, तो सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वह सीधे एजेंसी कार्यालय जाए या आधिकारिक ग्राहक सेवा चैनल के जरिए जानकारी ले। फोन पर जल्दबाजी में कुछ भी साझा करना या किसी ऐप को डाउनलोड कर लेना आज के समय में बहुत बड़ा जोखिम बन चुका है।
कौन लोग सबसे ज्यादा निशाने पर?
इस तरह की साइबर ठगी में सबसे ज्यादा निशाने पर वे लोग होते हैं जो तकनीकी रूप से बहुत सहज नहीं होते—जैसे बुजुर्ग, गृहिणियां, छोटे कस्बों और शहरों के आम उपभोक्ता, या वे लोग जो डिजिटल प्रक्रिया को पूरी तरह नहीं समझते। साइबर अपराधी जानते हैं कि गैस कनेक्शन हर घर की बुनियादी जरूरत है, इसलिए यह बहाना बहुत आसानी से भरोसा पैदा करता है।
अक्सर देखा गया है कि ठग पहले भरोसा जीतते हैं, फिर डर पैदा करते हैं, और अंत में “अभी तुरंत” कार्रवाई करने का दबाव बनाते हैं। यही तीन चरण उनकी सफलता का आधार होते हैं। अगर लोग सिर्फ एक बात याद रखें—डर और जल्दबाजी में कोई डिजिटल कदम नहीं उठाना है—तो कई बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
अगर ठगी हो जाए तो क्या करें?
साइबर ठगी के मामलों में सबसे अहम चीज समय होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो गया है, तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सबसे पहले अपने बैंक को सूचित करें, संबंधित बैंकिंग ऐप या कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराने की कोशिश करें और फिर बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
इसके अलावा आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही संभावना बढ़ती है कि लेनदेन को ट्रैक कर कुछ राशि रोकी या रिकवर की जा सके। देरी होने पर पैसा कई खातों और माध्यमों में घूमकर वापस पाना मुश्किल हो जाता है।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
पटना में एलपीजी बुकिंग और KYC अपडेट के नाम पर बढ़ रही साइबर ठगी ने यह साफ कर दिया है कि अब अपराधी रोजमर्रा की जरूरतों को भी जाल में बदल रहे हैं। गैस, बिजली, बैंक, आधार, पेंशन, केवाईसी—हर जरूरी सेवा को बहाना बनाकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में तकनीकी सावधानी अब सिर्फ सुविधा का विषय नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।
लोगों को चाहिए कि वे अपने घर के बुजुर्गों, महिलाओं और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले सदस्यों को भी इस तरह की ठगी के बारे में जरूर समझाएं। क्योंकि साइबर अपराधी किसी एक व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार की कमाई को निशाना बनाते हैं। याद रखिए—अनजान कॉल पर भरोसा नहीं, लिंक पर क्लिक नहीं, ऐप डाउनलोड नहीं, और OTP/PIN कभी साझा नहीं।
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